Sunday, April 29, 2007

चित्र




[चित्र आजकल , मार्च— २००७, प्रकाशन विभाग, नई दिल्ली से साभार]

महादेवी वर्मा के प्रति

महादेवी वर्मा विभिन्न विद्वानों की राय में-


' छायावादी कहे जाने वाले कवियों में महादेवी जी ही रहस्यवाद के भीतर रही हैं। उस अज्ञात प्रियतम के लिए वेदना ही उनके हृदय का भावकेन्द्र है जिससे अनेक प्रकार की भावनाएँ, छूट छूटकर झलक मारती रहती हैं। वेदना से इन्होंने अपना स्वाभाविक प्रेम व्यक्त किया है, उसी के साथ वे रहना चाहती हैं। उसके आगे मिलनसुख को भी वे कुछ नहीं गिनतीं। वे कहती हैं कि – मिलन का मत नाम ले मैं विरह में चिर हूँ।। इस वेदना को लेकर इन्होंने हृदय की ऐसी अनुभूतियाँ सामने रखी हैं जो लोकोत्तर हैं। कहाँ तक वे वास्तविक अनुभूतियाँ हैं आर कहाँ तक अनुभूतियों की रमणीय कल्पना है, यह नहीं कहा जा सकता ।
एक पक्ष मेा अनंत सुषमा, दूसरे पक्ष में अपार वेदना, विश्व के छोर हैं जिनके बीच उसकी अभिव्यक्ति होती है—
यह दोनों दो ओरें थीं
संसृति की चित्रपटी की
उस बिन मेरा दुख सूना
मुझ बिन वह सुषमा फीकी ।


पीड़ा का चसका इतना है कि —

तुमको पीड़ा में ढूँढ़ा
तुममें ढूँढूगी पीड़ा ।


[ -रामचन्द्र शुक्ल
हिन्दी साहित्य का इतिहास, नागरी प्रचारिणी सभा, काशी, उन्नीसवां संस्करण, संवत् — २०३८, पृष्ठ– ४८७ ]


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स्मृति के क्षण-9



( महादेवी वर्मा अज्ञेय एवं इलाचन्द्र जोशी के साथ)


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[ साहित्य धर्मिता पत्रिका, महादेवी वर्मा विशेषांक अप्रैल १९८८ से साभार ]

स्मृति के क्षण-8



( महादेवी वर्मा डॉ॰ राधाकृष्णन जी के साथ)

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[ साहित्य धर्मिता पत्रिका, महादेवी वर्मा विशेषांक अप्रैल १९८८ से साभार ]

स्मृति के क्षण-7



( महादेवी वर्मा प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी के साथ )
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[ साहित्य धर्मिता पत्रिका, महादेवी वर्मा विशेषांक अप्रैल १९८८ से साभार ]

स्मृति के क्षण-6



( महादेवी वर्मा माखनलाल चतुर्वेदी के साथ )

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[ साहित्य धर्मिता पत्रिका, महादेवी वर्मा विशेषांक अप्रैल १९८८ से साभार ]

स्मृति के क्षण-5



( महादेवी वर्मा सुमित्रानन्दन पन्त और रामधारी सिंह दिनकर के साथ )

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[ साहित्य धर्मिता पत्रिका, महादेवी वर्मा विशेषांक अप्रैल १९८८ से साभार ]

स्मृति के क्षण-4



[महादेवी वर्मा को सुमित्रानन्दन पन्त को राखी बाँधते हुए ]

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( साहित्य धर्मिता पत्रिका, महादेवी वर्मा विशेषांक अप्रैल १९८८ से साभार )

स्मृति के क्षण-3



[ महादेवी वर्मा को राखी बाँधते हुए सुमित्रानन्दन पन्त ]


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[ साहित्य धर्मिता पत्रिका, महादेवी वर्मा विशेषांक अप्रैल १९८८ से साभार ]

स्मृति के क्षण-2



(महादेवी वर्मा के साथ इंग्लैण्ड की प्रधानमंत्री मारग्रेट थ्रेचर)
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[ साहित्य धर्मिता पत्रिका, महादेवी वर्मा विशेषांक अप्रैल १९८८ से साभार ]

स्मृति के क्षण-1




( पं० हजारीप्रसाद द्विवेदी एवं अन्य साहित्यकारों के साथ महादेवी वर्मा )
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साहित्य धर्मिता पत्रिका, महादेवी वर्मा विशेषांक अप्रैल १९८८ से साभार
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Friday, October 28, 2005

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